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એક સુંદર ગીત…ફિલ્મ “શગૂફા” થી….
અમુક દિવસો પહેલા ક્યાંકથી એક ગીત સાંભળ્યું, જયારે પહેલી વખત સાંભળ્યું ત્યારે કઈ ખાસ ના લાગ્યું પણ પછી સતત બે દિવસ સુધી મનમાં આ જ ગીત ગણગણતો રહ્યો, છેવટે ફરી આ ગીત સાંભળ્યું, લગભગ સાતેક વખત સાંભળ્યું, ત્યારે લાગ્યું કે આ ગીત પણ એવા બીજા ઘણા ગીતોની યાદીમાં મૂકી શકાય કે જેના વ્યસની થઇ જવાય એવું છે.
આ ગીત ફિલ્મ ‘શગૂફા’નું છે. આ ફિલ્મ ૧૯૫૩માં રીલીઝ થઇ હતી જેમાં પ્રેમનાથ, બીનારાય અને રાજેન્દ્રનાથે મુખ્ય ભૂમિકા ભજવી હતી. ફિલ્મનાં ગીતો લખ્યા હતા રાજેન્દ્ર કૃષ્ણને અને સંગીત આપ્યું હતું સી. રામચંદ્ર એ.
આ ગીતની વિશેષતા એની સાદગીમાં છે. એકદમ સરળ ધૂન, ઓછા વાદ્યો, અને અતિ મધુર ગાયકી. લતા મંગેશકરે ઓળઘોળ થઈને આ ગીત ગાયું છે. પિઆનોથી થતી શરૂઆત ખૂબ સુંદર છે. આખુંય ગીત જાણે એક પ્રવાહમાં વહી જાય છે.
તો સાંભળો આ સુંદર ગીત ” અપના પતા બતા દે….”
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बहार आयी मगर इस दिल की वीरानी नहीं जाती
चला आ, ख़ाक वीरानों की अब छानी नहीं जाती
क़सम तेरी तेरे ग़म में ये हालत हो गयी मेरी
के सूरत मौत से भी अब तो पहचानी नहीं जाती
अपना पता बता दे या मेरे पास आ जा
दिल है उदास आ जा -२
दम रुक गया लबों पर आवाज़ आखरी है
मेहमान कोई दम की, मजबूर ज़िंदगी है
ले दे के रह गयी है मरने की आस आ जा
दिल है उदास आजा -२
अपना पता बता दे …
रुकने लगी हैं नव्झे थर्रा रही हैं आँखें
मूँह फेर कर जहाँ से अब जा रही हैं आँखें
होठों पे इल्तेजा है बस एक बार आ जा
दिल है उदास आजा -२
अपना पता बता दे …
अपना पता बता दे या मेरे पास आ जा
दिल है उदास आ जा -२
"Chand madham hai…" a beautiful and ‘not so popular song’ from LATAJI-MADAN MOHAN
The song I am putting here is one of my most favourite numbers. Lataji and Madan mohan has given so many beautiful songs. this is one of them but this song is not famous like other numbers.
the song “चाँद मद्धम है…” is from the movie “Railway platform”. the movie was released in 1955 staring Sunil Dutt and Nalini Jayvant. The movie was written and directed by Ramesh Sahegal. Music was composed by Madan मोहन and songs were written by Sahir Ludhiyanavi.
This is a very soothing song, having very less instruments.
गाने के साथ साथ बजती वायोलिन, पियानो के chords और फ्लूट के कुछ pieces के अलावा इस गाने में लताजीकी गायकी और दिल से निकली हुई आवाज़ ही preference में है ।
यह गाना राग भीमपलासी पर आधारित है । मदन मोहनजी के गाने बहुत मीठे होते है and this is not an exception. Lataji has sung her level best here. इस गाने में कोई हरकत मुरकी नही है पर बिल्कुल सादगी से पुरे, पुरे दिल से गाना गया है जो दिलको छू जाता है।
बात करे गाने के बोल की…. साहिर लुधियानवी साहब ने कमाल कर दिया है गाना लिख कर । हर एक लाइन बेहद खूबसूरत है। यह ग़ज़ल उर्दू गज़लों की कुछ चुनंदा गज़लोंमें से एक है और इसे उतने ही खुबसूरत अंदाज़ से निभाया है लताजी ने।
तो लीजिये सुनिए ये सुंदर गीत.
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ये रहे गीतके बोल…
चांद मद्धम है, आसमां चुप है।
नींद की गोद में जहां चुप है।
दूर वादी पे दूधिया बादल झुक के पर्वत को प्यार करते हैं।
दिल में नाकाम हसरतें लेकर,हम तेरा इन्तज़ार करते हैं।
इन बहारों के साये में आ जा फिर मोहब्बत जवां रहे न रहे।
ज़िन्दगी तेरे नामुरादों पर कल तलक मेहरबां रहे न रहे।
रोज की तरह आज भी तारे सुबह की ग़र्द में न सो जायें।
आ तेरे ग़म में जागती आंखें कम से कम एक रात सो जायें।
चांद मद्धम है, आसमां चुप है।
नींद की गोद में जहां चुप है।
१) गर्द – धूल, ख़ाक, एक प्रकारका रेशमी कपडा
२)नामुराद- बदनसीब , जिसकी कामना पुरी न हुई हो
