Archive for the ‘ghazals’ Category
“आज जाने की जिद्द ना करो…” Version 4 – ओसमान मीर…

“आज जाने की जिद्द ना करो…” श्रृंखला की इस अंतिम कड़ी में आज सुनते है यह ग़ज़ल ओसमान मीर से I ओसमान मीर कच्छ- गुजरात के उन चुनंदा बहतरीन गायकों में से है जिन्हें लोकसंगीत में तो महारथ हांसल है ही पर शास्त्रीय गायकी में भी उतनी ही निपुणता है I ओसमान मीर गुजराती लोकसंगीत जैसे की “गरबा” , “डायरा” और गुजराती लोकभजन के लिए विख्यात है I उन्हों ने कुछ ग़ज़ले भी गाई है जिनमे से एक यहाँ पर पेश की गयी है I उनकी आवाज़ की गहराई और शास्त्रीय गायकी दोनों इस ग़ज़ल में उभर कर सुनाई देते है I तो लीजिये सुनिए “आज जाने की जिद्द ना करो…..” ओसमान मीर की आवाज़ में I
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“आज जाने की जिद्द ना करो…” version – 4, शफ़क़त अमानत अली…
“आज जाने की जिद्द ना करो…” के अलग अलग versions में आज इस ग़ज़ल को सुनते है पटियाला घराने के मशहूर गायक शफ़क़त अमानत अली से I शास्त्रीय गायकी उन्हें heridity में मिली है I उनकी गायकी में रूहानी सूफियाना अंदाज़ छलकता है I कई हिंदी फिल्मो के गानों में भी उन्हों ने अपनी आवाज का परिचय दिया है.. जैसे की फिल्म ‘ड़ोर’ का गीत “ये हौंसला…” या ‘कभी अलविदा ना कहना’ का गीत “मितवा…” I शफ़क़त अमानत अली पाकिस्तानी बेन्ड Fuzon के मुख्या गायक थे I उनका एल्बम “सागर” काफी लोकप्रिय हुआ था I
पकिस्तान में आयोजित एक कोंसेर्ट में शफ़क़त अमानत अली ने ग़ज़ल ‘आज जाने की जिद्द ना करो…’ को गाया था… उस performence की live recording सुनवाने जा रहा हुं I आम तौर पर शफ़क़त अमानत अली शास्त्रीय गायकी की हरकत मुर्किया और तान के लिए जाने जाते है पर इस ग़ज़ल को उन्होंने बड़ी सादगी से गाया है I ग़ज़ल की शुरुआत में राग यमन के अद्भूत सुर लगाए है I background music, orchestration और interlutes भी काबिल-ए-दाद है I कुछ जगहों पर pronounciation में गड़बड़ है but its negligeble… तो लीजिये सुनीये शफ़क़त अमानत अली की रूहानी आवाज में “आज जाने की जिद्द ना करो…”
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“आज जाने की जिद्द ना करो…” version 3, Asha Bhosle
2006 में आशाजी का एक एल्बम आया था, Love Supreme… दो सी.डी. के इस एल्बम में एक सी.डी. में आशाजी के गाये हुए ओरिजिनल old romantic tracks थे, और दूसरी सी.डी. में western-fusion background scores पर आशाजी ने कुछ विख्यात ग़ज़ले गाई थी I यह एल्बम विदेशी श्रोताओ को ध्यान में रखकर बनाया गया था I हालाँकि यह एल्बम को कुछ अच्छा प्रतिसाद नहीं मिला फिर भी इस एल्बम के कुछ गानों में किये गए नवतर प्रयोग काबिल-ए-दाद थे I
आशाजी ने इस एल्बम में “आज जाने की जिद्द ना करो…” ग़ज़ल गाई है I इस track की विशेषताओं को देखें तो, सब से प्रथम ध्यान खिचता है इसका background music I ग़ज़ल में बजते हुए soft ballad beats, bass, acoustic guitars, interlute male chorus, synth pad and harmonium ग़ज़ल को सही मायने में एक soothing, romantic touch देते है I इस ग़ज़ल को western fusion ballad touch देने के बावजूद राग में कही छेड़खानी नहीं की गयी है I यहाँ तक की interlute music भी राग यमन में ही बजता है I आशाजी ने भी खूब निभाया है I
तो सुनिए “आज जाने की जिद्द ना करो…” एक अलग version में…
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ये रहे ग़ज़ल के बोल…
आज जाने की ज़िद्द ना करो
यूँही पहलू में बैठे रहो…
हाय, मर जायेंगे
हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया न करो
तुम ही सोचो ज़रा, क्यों न रोकें तुम्हें?
जान जाती है जब उठ के जाते हो तुम
तुमको अपनी क़सम जान-ए-जाँ
बात इतनी मेरी मान लो
आज जाने की…
वक़्त की क़ैद में ज़िंदगी है मगर
चंद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं
इनको खोकर कहीं, जान-ए-जाँ
उम्र भर ना तरसते रहो
आज जाने की…