Archive for the ‘from films’ Category
एक बेहतरीन गाना फिल्म ‘ईश्किया’ से – “दिल तो बच्चा है जी…”

आज सुबह ही यह गाना सुना… करीबन १० बार सुना और फिर भी जी नहीं भरा I विशाल भारद्वाज और गुलज़ार की जोड़ी हर बार चाहको की अपेक्षाओं पर खरी उतरी है और this track is not an exception. हाल ही में रिलीस होने वाली फिल्म ‘ईश्किया’ का यह बेहतरीन गाना कोम्पोस किया है विशाल भारद्वाज ने, बोल लिखे है गुलज़ार ने और गाया है राहत फ़तेह अली खान ने I
यह गाना इतना मीठा है के बात मत पूछो… यह गाना आपको सीधे ही ३०-४० साल पहले ले जाएगा और याद दिलाएगा कुछ सदाबहार नग्मों की जैसे “दिल की नज़र से…”, ” ये रातें ये मौसम…” “कौन है जो सपनों में आया…” आदि…
गाने के शुरुआत होती है मधुर एकोर्डियन से और फिर गिटार के कोर्ड्स बजते है और साथ में walts की soothing rhythms और राहत फ़तेह अली खान की मखमली आवाज़.. यह गाना सुनने के बाद कौन कहेगा की यह गाना किसी सूफियाना क़व्वाल ने गाया है…
बात रही गुलज़ार के बोल की… अब क्या बताये…”दिल तो बच्चा है जी…” यह पंक्ति ही कितना कुछ कह जाती है I गाने की हर पंक्ति में आपको गुलज़ार की खुशबु मिलेगी I तो सुनिए यह बेहतरीन गाना फिल्म ईश्किया से….
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ये रहे गाने के बोल…
ऐसी उलझी नज़र उनसे हटती नहीं
दांत से रेशमी डोर कटती नहीं
उम्र कबकी बरस के सफैद हो गयी
कारी बदरी जवानी की छटती नहीं
वल्ला ये धड़कन बढ़ने लगी है
चहरे की रंगत उड़ने लगी है
डर लगता है तनहा सोने में जी
दिल तो बच्चा है जी…
थोडा कच्चा है जी….
किसको पता था पहलू में रखा
दिल ऐसा पाज़ी भी होगा
हम तो हमेशा समजते थे कोई
हम जैसा हाजी ही होगा
हाए जोर करे कितना शोर करे
बेवजह बातो पे ऐवे गौर करे
दिल सा कोई कमीना नहीं
कोई तो रोके कोई तो टोके
इस उम्र में अब खाओगे धोखे
दर लगता है इश्क करने में जी
दिल तो बच्चा है जी….
ऐसी उदासी बैठी है दिल में
हसने से घबरा रहे है
सारी जवानी कतरा के काटी
पीरी में टकरा गए है
दिल धड़कता है तो ऐसे लगता है वो
आ रहा है यही देखता ही न हो
प्रेम की मारे कटार रे
तौबा ये लम्हे कटते नहीं क्यों
आँखों से मेरी हटते नहीं क्यों
डर लगता है खुदसे कहने में जी
दिल तो बच्चा है जी…
D.J. Medly of A.R.Rahman
आज की पोस्ट थोडी हटके है I आज एक D.J.Medly सुनाने जा रहा हुं I
यह Medly ए.आर.रहमान के गानों की है I मजे की बात ये है की इस medly में रहमान के कई मशहूर गानों को मिक्स किया गया है और गाने की रिधम का tempo एवं गाने की pitch भी सही जा रही है (pitch में एकाद जगह पर गड़बड़ लगती है पर its negligible) I medly का flow भी maintained है I सुननेमें यह medly जितनी आसान है उतनी ही बनाने में मुश्किल हैI हालाकि अभी तक इस medly के सर्जक D.J. का नाम पता करने में मैं असफल रहा हुं लेकिन जिसने भी इस medly को बनाया है उसे धन्यवाद I
तो सुनिए a D.J. Medly of ARR.
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कभी शाम ढले…. फ़िल्म "सूर" का सुंदर गीत…

आज जो गाना पोस्ट करने जा रहा हुं , वो गाना इतना दुर्लभ नही है … आपमें से कई लोगो ने इस गाने को सुना होगा और सराहा भी होगा… पर हाँ , यह ज़रूर कह सकता हुं की गाने के पीछे की गई मेहनत और गाने की खूबसूरती के हिसाब से जितनी चाहना गाने को मिलनी चाहिए उतनी नही मिली।
यह गाना फ़िल्म “सूर” से है। यह फ़िल्म में लकी अली (महान हास्य कलाकार स्व महमूद के बेटे ) जो की गायक है, उन्हों ने lead role play किया था । फ़िल्म तो कुछ ख़ास नही थी पर जो गौर करने लायक था वो था इस फ़िल्म का संगीत।
इस फ़िल्म में एम. एम. करीम साहब का संगीत और नीदा फ़ज़ली साहब के बोल थे
इस फ़िल्म का एक गाना बहोत हिट हुआ tha “आ भी जा , आ भी जा , ऐ सुबहा आ भी जा ”
यह गाने को लकी अली ने गाया था ।
आज में जो गाना सुना रहा हुं उसे गाया है मेरी पसंदीदा गायिका महालक्ष्मी ने ,
गाने की दूसरी ख़ास बात है गाने का अरेंजिंग।
वायोलिन और स्ट्रिंग्स के कुछ बहतरीन play peaces, कमाल की हार्मोनी वोइसेस ( खास कर गीत के अंत भाग में) और महालक्ष्मी की आवाज़ की range. यह गाने की इफेक्ट ऐसी दी गई है मनो यह गाना लाइव परफोर्म या रिकॉर्ड हुआ हो ।
बहोत ही सुंदर कोम्पोसिशन बनायी है करीम साहब ने। एम. एम. करीम की ज्यादातर धुनों में स्ट्रिंग्स का अद्भूत प्रयोग है । वेस्टर्न हार्मोनी भी वो बड़ी खूबसूरती से पेश करते है।
तो लीजिये सुनिए यह बेहतरीन गाना…..
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ये रहे गीत के बोल…
कभी शाम ढले तो मेरे दिल में आ जाना
कभी चाँद खिले तो मेरे दिल में आ जाना ,
मगर आना इस तरह से के यहाँ से
फ़िर न जाना,
तू नही है मगर फ़िर भी तू पास है
बात हो कोई भी तेरी ही बात है
तू ही मेरे अन्दर है तू ही मेरे बाहर है
जब से तुज को जाना है मैंने अपना माना है
मगर आना इस तरह तुम
के यहाँ से फिर न जाना
रात दिन की मेरी दिलकशी तुमसे है,
जिन्दगीकी कसम जिदगी तुमसे है,
तुम ही मेरी आँखें हो सुनी तनहा रातो में,
चाहे जीतनी दूरी हो तुम हो मेरी बाहों में .
मगर आना इस तरह तुम
के यहाँ से फिर न जाना
कभी शाम ढले…