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Archive for January 6th, 2010

PostHeaderIcon एक बेहतरीन गाना फिल्म ‘ईश्किया’ से – “दिल तो बच्चा है जी…”

ishqiya
आज सुबह ही यह गाना सुना… करीबन १० बार सुना और फिर भी जी नहीं भरा I विशाल भारद्वाज और गुलज़ार की जोड़ी हर बार चाहको की अपेक्षाओं पर खरी उतरी है और this track is not an exception. हाल ही में रिलीस होने वाली फिल्म ‘ईश्किया’ का यह बेहतरीन गाना कोम्पोस किया है विशाल भारद्वाज ने, बोल लिखे है गुलज़ार ने और गाया है राहत फ़तेह अली खान ने I
यह गाना इतना मीठा है के बात मत पूछो… यह गाना आपको सीधे ही ३०-४० साल पहले ले जाएगा और याद दिलाएगा कुछ सदाबहार नग्मों की जैसे “दिल की नज़र से…”, ” ये रातें ये मौसम…” “कौन है जो सपनों में आया…” आदि…
गाने के शुरुआत होती है मधुर एकोर्डियन से और फिर गिटार के कोर्ड्स बजते है और साथ में walts की soothing rhythms और राहत फ़तेह अली खान की मखमली आवाज़.. यह गाना सुनने के बाद कौन कहेगा की यह गाना किसी सूफियाना क़व्वाल ने गाया है…
बात रही गुलज़ार के बोल की… अब क्या बताये…”दिल तो बच्चा है जी…” यह पंक्ति ही कितना कुछ कह जाती है I गाने की हर पंक्ति में आपको गुलज़ार की खुशबु मिलेगी I तो सुनिए यह बेहतरीन गाना फिल्म ईश्किया से….

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ये रहे गाने के बोल…
ऐसी उलझी नज़र उनसे हटती नहीं
दांत से रेशमी डोर कटती नहीं
उम्र कबकी बरस के सफैद हो गयी
कारी बदरी जवानी की छटती नहीं
वल्ला ये धड़कन बढ़ने लगी है
चहरे की रंगत उड़ने लगी है
डर लगता है तनहा सोने में जी
दिल तो बच्चा है जी…
थोडा कच्चा है जी….


किसको पता था पहलू में रखा
दिल ऐसा पाज़ी भी होगा
हम तो हमेशा समजते थे कोई
हम जैसा हाजी ही होगा
हाए जोर करे कितना शोर करे
बेवजह बातो पे ऐवे गौर करे
दिल सा कोई कमीना नहीं
कोई तो रोके कोई तो टोके
इस उम्र में अब खाओगे धोखे
दर लगता है इश्क करने में जी
दिल तो बच्चा है जी….


ऐसी उदासी बैठी है दिल में
हसने से घबरा रहे है
सारी जवानी कतरा के काटी
पीरी में टकरा गए है
दिल धड़कता है तो ऐसे लगता है वो
आ रहा है यही देखता ही न हो
प्रेम की मारे कटार रे
तौबा ये लम्हे कटते नहीं क्यों
आँखों से मेरी हटते नहीं क्यों
डर लगता है खुदसे कहने में जी
दिल तो बच्चा है जी…

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