Archive for November, 2009
एक मधुर राजस्थानी लोकगीत
गत सप्ताह मैं कुछ दोस्तोंके साथ पुष्कर मेले में गया था I बड़ा ही मजेदार अनुभव रहा I राजस्थानी संस्कृति, राजस्थानी लोग, राजस्थानी पोशाक, ऊंट, घोडे, रेत…. अभी भी राजस्थान का ही बुखार चढा हुआ है… तो सोचा की आज कुछ राजस्थानी सुनते है I आज राजस्थानी लोकसंगीत सुनवाने जा रहा हुं I यह track “मुसाफिर- ढोला मारू” नामके एल्बम में से है I यह इंटरनेशनल एल्बम है जिसका रिकॉर्डिंग बेल्जियम में हुआ था I मजे की बात ये है की लोकसंगीत की शुद्धता में कही छेड़छाड़ नहीं की गयी है I गाना सुनते ही राजस्थान की सुगंध आने लगती है I गाने में बजते हुए वाद्योंको ध्यान से सुनना, खासकर ढोलक और अन्य रिधम इंस्ट्रुमेंट्स… तो लीजिये राजस्थानी मिटटी की खुशबु…
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आज जाने की ज़िद्द ना करो…by different artists
आज जाने की ज़िद्द ना करो….
यह ख़ूबसूरत गाना हमने बेगम फरीदा खानमकी आवाज़ में तो सुना ही है I
इस गाने को कई और मशहूर हस्तियों ने भी बखूबी गाया है, जैसे की आशा भोसले, अनूप जलोटा, इला अरुण, ओसमान मीर, शफकत अमानत अली, हबीब वली मोहम्मद… ब्रायन सिलास ने इस गाने को पियानो पर बखूबी निभाया है I
आज दो कालाकारों से इस गाने को सुनते है I
इस बेहतरीन ग़ज़ल को लिखा है फैयाज़ हाशमी ने और कोम्पोज़र है पाकिस्तान के मशहूर संगीतकार सोहेल राणा I
पहले कलाकार है ग़ज़ल गायक हबीब वली मोहम्मद साहब I इनके बारे में क्या लिखे…. उनकी आवाज ही उनकी पहचान है I ज़फर के कई कलाम उन्होंने गाये और काफी मशहूर हुए I पाकिस्तान के सबसे बेहतरीन ग़ज़ल गायकोंमें से एक है हबीब वली मोहम्मद साहब I
तो लीजिये सुनिए हबीब वली मोहम्मद साहब की आवाज में ‘आज जाने की ज़िद्द ना करो….’
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अब आप सुनिए यही गाना पियानो पर I इसे बजाया है मशहूर पियानो वादक ब्रायन सिलास ने I ब्रायन सिलासने अपने पियानो पर कई फ़िल्मी गीतों को तराशा है I उनके बारे में और जानकारी आप उनकी वेब-साईट http://www.briansilas.com पर से ले सकते है I
ये रहा पियानो पर ‘आज जाने की ज़िद्द ना करो….’
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ये रहे ग़ज़ल के बोल…
आज जाने की ज़िद्द ना करो
यूँही पहलू में बैठे रहो…
हाय, मर जायेंगे
हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया न करो
तुम ही सोचो ज़रा, क्यों न रोकें तुम्हें?
जान जाती है जब उठ के जाते हो तुम
तुमको अपनी क़सम जान-ए-जाँ
बात इतनी मेरी मान लो
आज जाने की…
वक़्त की क़ैद में ज़िंदगी है मगर
चंद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं
इनको खोकर कहीं, जान-ए-जाँ
उम्र भर ना तरसते रहो
आज जाने की…