Archive for November 28th, 2009
“आज जाने की जिद्द ना करो…” version – 4, शफ़क़त अमानत अली…
“आज जाने की जिद्द ना करो…” के अलग अलग versions में आज इस ग़ज़ल को सुनते है पटियाला घराने के मशहूर गायक शफ़क़त अमानत अली से I शास्त्रीय गायकी उन्हें heridity में मिली है I उनकी गायकी में रूहानी सूफियाना अंदाज़ छलकता है I कई हिंदी फिल्मो के गानों में भी उन्हों ने अपनी आवाज का परिचय दिया है.. जैसे की फिल्म ‘ड़ोर’ का गीत “ये हौंसला…” या ‘कभी अलविदा ना कहना’ का गीत “मितवा…” I शफ़क़त अमानत अली पाकिस्तानी बेन्ड Fuzon के मुख्या गायक थे I उनका एल्बम “सागर” काफी लोकप्रिय हुआ था I
पकिस्तान में आयोजित एक कोंसेर्ट में शफ़क़त अमानत अली ने ग़ज़ल ‘आज जाने की जिद्द ना करो…’ को गाया था… उस performence की live recording सुनवाने जा रहा हुं I आम तौर पर शफ़क़त अमानत अली शास्त्रीय गायकी की हरकत मुर्किया और तान के लिए जाने जाते है पर इस ग़ज़ल को उन्होंने बड़ी सादगी से गाया है I ग़ज़ल की शुरुआत में राग यमन के अद्भूत सुर लगाए है I background music, orchestration और interlutes भी काबिल-ए-दाद है I कुछ जगहों पर pronounciation में गड़बड़ है but its negligeble… तो लीजिये सुनीये शफ़क़त अमानत अली की रूहानी आवाज में “आज जाने की जिद्द ना करो…”
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