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October 2009
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Archive for October, 2009

PostHeaderIcon A fusion in Raga Sarang

Joshua


आज का गीत राग सारंग पर आधारित है.. या कहिये की राग सारंग ही इस गीत का टाइटल है I सारंग की मधुर सरगम कोरस में , दाराबुका, तबला और ड्रम का combination, सेक्सोफोन की मधुर आवाज़ और….. प्रेम योशुआ का कोम्पोसिशन…..मानो मुग्ध कर देता है I शुरुआत में लोकल बाज़ार की खुशबु है और फिर धीरे धीरे चढ़ता है सारंग का रंग I

बात करें प्रेम योशुआ की…
Prem Joshua is a Multi-instrumentalist and composer, pioneer extraordinaire in the field of World Fusion Music. Born in Germany to a musical family, Joshua began learning the flute at the age of five, becoming a fine flautist while still a child. Joshua was highly influenced after Indian music when he heard Pt. Ravishankar’s sitar at the age of 16. At the age of 18, he left school, home, ended all his career plans, and traveled overland from Europe to India. Prem Joshua has its own band of 4 people and he himself plays many instruments like various flutes, saxofone, sitar, dilruba etc.To date he has released 14 albums.
तो लीजिये सुनिए SARANG – BY Prem Joshua

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PostHeaderIcon कभी शाम ढले…. फ़िल्म "सूर" का सुंदर गीत…

Sur
आज जो गाना पोस्ट करने जा रहा हुं , वो गाना इतना दुर्लभ नही है … आपमें से कई लोगो ने इस गाने को सुना होगा और सराहा भी होगा… पर हाँ , यह ज़रूर कह सकता हुं की गाने के पीछे की गई मेहनत और गाने की खूबसूरती के हिसाब से जितनी चाहना गाने को मिलनी चाहिए उतनी नही मिली।
यह गाना फ़िल्म “सूर” से है। यह फ़िल्म में लकी अली (महान हास्य कलाकार स्व महमूद के बेटे ) जो की गायक है, उन्हों ने lead role play किया था । फ़िल्म तो कुछ ख़ास नही थी पर जो गौर करने लायक था वो था इस फ़िल्म का संगीत।


इस फ़िल्म में एम. एम. करीम साहब का संगीत और नीदा फ़ज़ली साहब के बोल थे
इस फ़िल्म का एक गाना बहोत हिट हुआ tha “आ भी जा , आ भी जा , ऐ सुबहा आ भी जा ”
यह गाने को लकी अली ने गाया था ।


आज में जो गाना सुना रहा हुं उसे गाया है मेरी पसंदीदा गायिका महालक्ष्मी ने ,
गाने की दूसरी ख़ास बात है गाने का अरेंजिंग।
वायोलिन और स्ट्रिंग्स के कुछ बहतरीन play peaces, कमाल की हार्मोनी वोइसेस ( खास कर गीत के अंत भाग में) और महालक्ष्मी की आवाज़ की range. यह गाने की इफेक्ट ऐसी दी गई है मनो यह गाना लाइव परफोर्म या रिकॉर्ड हुआ हो ।
बहोत ही सुंदर कोम्पोसिशन बनायी है करीम साहब ने। एम. एम. करीम की ज्यादातर धुनों में स्ट्रिंग्स का अद्भूत प्रयोग है । वेस्टर्न हार्मोनी भी वो बड़ी खूबसूरती से पेश करते है।
तो लीजिये सुनिए यह बेहतरीन गाना…..

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ये रहे गीत के बोल…
कभी शाम ढले तो मेरे दिल में आ जाना
कभी चाँद खिले तो मेरे दिल में आ जाना ,
मगर आना इस तरह से के यहाँ से
फ़िर न जाना,
तू नही है मगर फ़िर भी तू पास है
बात हो कोई भी तेरी ही बात है
तू ही मेरे अन्दर है तू ही मेरे बाहर है
जब से तुज को जाना है मैंने अपना माना है
मगर आना इस तरह तुम
के यहाँ से फिर न जाना
रात दिन की मेरी दिलकशी तुमसे है,
जिन्दगीकी कसम जिदगी तुमसे है,
तुम ही मेरी आँखें हो सुनी तनहा रातो में,
चाहे जीतनी दूरी हो तुम हो मेरी बाहों में .
मगर आना इस तरह तुम
के यहाँ से फिर न जाना
कभी शाम ढले…

PostHeaderIcon An Indo-Spanish fusion from INDIA LUCIA


Indialucia is a musical project, which fuses two fascinating styles of music: Indian and Flamenco music. Many renowned artists of Indias as well as spain have participated in this album.
यह एल्बम २००५ में रिलीज़ हुई थी  I  इस एल्बम में कुल १० tracks  है, उसमे से पहला  track  सुनवाने जा रहा हुं I  इस ट्रैक में बहोत वैविध्य है, शुरुआत में तबले के बोल से लेकर सालसा फ्लेमेंको स्टाइल की तालिया, जैज़ पियानो, फ्लेमेंको गिटार, सितार, जुगलबन्धि और न जाने क्या – क्या I  सही मायने में  कड़ी मेहनत का परिणाम है यह एल्बम I
लीजिये सुनिए इस  melodious track को  I
कलाकारों की सूचि नीचे दी गयी है  I

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Miguel CZACHOWSKI – guitarras flamencas, percusión, palmas
Avaneendra SHEOLIKAR – sitar
Sandesh POPATKAR – tabla
Pierluca PINEROLI – percusión, choirs
Prasad KHAPARDE – vocal
Tomasz PALA – piano
Ireneusz WYROBEK – palmas

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